शनिवार, 16 अक्टूबर 2021

मेरे नगर की ध्वस्त जलव्यवस्था

 हो ओ आने वाला नल, जाने वाला है, हो सके तो इसमें कटोरी चम्मच सब भर लो, नल जो ये जाने वाला है, अब कल परसों कहां आने वाला है हो ओ


मतिभ्रम(नल का इंतजार करते करते थकी आंखों का हाल)

इक बार टप्प से टिपका गिरा कहीं, दौड़ा नल आया तो नहीं है, पाया गीला कहीं नहीं, सुखा था हर कहीं।

हो ओ आने वाला नल जाने वाला है।

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