शनिवार, 16 अक्टूबर 2021

लौट आ

 एक बार एक माओवादी जंगल से शहर आया। आदत के हिसाब से सुबह-सुबह लौटा ले के चल दिया, पर स्वच्छ भारत मिशन वालो ने पिछवाड़े पर डंडे मारकर उससे लौटा छिन लिया, तब से अपने रेडियो पर चैनल बदल बदल कर एक ही गाना बार बार बजा रहा है

Woh meri neend mera chain mujhe lauta do

Woh mera pyaar mera dard mujhe lauta d

o



मेरे नगर की ध्वस्त जलव्यवस्था

 हो ओ आने वाला नल, जाने वाला है, हो सके तो इसमें कटोरी चम्मच सब भर लो, नल जो ये जाने वाला है, अब कल परसों कहां आने वाला है हो ओ


मतिभ्रम(नल का इंतजार करते करते थकी आंखों का हाल)

इक बार टप्प से टिपका गिरा कहीं, दौड़ा नल आया तो नहीं है, पाया गीला कहीं नहीं, सुखा था हर कहीं।

हो ओ आने वाला नल जाने वाला है।

बुधवार, 27 जनवरी 2021

युं ही फिसल गए हा हा हा var 1.0

 औ मैं निकला हड्डी ले के, मैं भागा, सब ट्रेफिक, सब सिग्नल तोड आया, औ रब जाने, कब रस्ते में, सड़क पे इक मोड़ आया, उत्थे सब हड्डीयां तोड आया।


जो उड़ते थे  हाय...

वो जो उड़ते थे एक्सिलरेटर खिंचते खिंचते, 

लंगड़ा हो गए, ब्रेक मारते-मारते।

सोचता हूँ..

सोचता हूँ के वो कितने मासूम थे

हैंडिकैप्ड हो गए देखते देखते

सोचता हूँ के वो कितने मासूम थे

 हैंडिकैप्ड हो गए देखते देखते।


सर्वीस नहीं कराऊंगा, मैं फिर भी तुमको दौड़ऊंगा, 

ब्रेक फेल कर लें, तो शायद मैं मर जाऊंगा, मैं फिर भी एक्सिलरेटर दबाऊंगा, मैं फिर भी तुमको दौड़ऊंगा ।