रविवार, 6 नवंबर 2022

नीलम के बुढ़ापे का घुमर



 उम्र पच्चीस की सर पे ओढ़ के, डाय लगा के घुमे।


करके नये जमाने के फेशन, बुढऊ घुमर घुमर घुमे।


रिटायरमेंट की उम्र में शर्म जग की छोड़ के घुमे।


बुढऊ घुमर घुमर घुमे।


समझ आवे नहीं, टिवी मोबाइल की दुनिया 


सठिया गया बुढऊ घुमर घुमर घुमे।


याद रहे ना बिते पल कि बातें, बस भुले भटके अटकें।


बुढऊ सुनाय, तो कहानी बस घुमर घुमर घुमे।


छोड़ गये सब दोस्त यार, मिले नहीं कोई बतीयाने


और आवे नहीं निंद, तो बुढऊ घुमर घुमर घुमे।


भुख न लागे, बस चुरण पुड़िया चाटे , 


फिर भी आवे नहीं मोशन, तो बुढऊ घुमर घुमर घुमे।


ले नहीं पावे लटके-झटके ठुमके, ले तो कमरिया चटके,


डांस पार्टी का मुड़ बने तो, बुढऊ बस घुमर घुमर घुमे।


नीलम कवी के ठाठ बुढ़ापे में घूमर घूमर घूमर घूमर घूमर घूमे रे


घूमर घूमर घूमे रे भाईसा घूमर घूमे रे

मंगलवार, 28 जून 2022

Excuse me please!

 My name is एकनाथ शिंदेलवीस,

मैं गुवाहाटी के होटल से बोलरेला हुं।

जिसे चाहे, जब चाहे, चला आये 

होटल में ४२० खोली बुक करेला हूं 

मेरे बाजु कि खोली में रहेगी कोई मिनीस्टर बनने वाली 

जिसे चाहे,जब चाहे, चला आये 

Excuse me please!


Excuse me please!



रविवार, 27 मार्च 2022

Happy April Fool's day in Advance

 A "Shri 420" remake starring Nargis "Biden" Datt and Raj "zelenski" Kapoor

MALE

War हुआ है, संहार हुआ, प्रहार से फिर क्यो डरता है, बाइडीन;

FEMALE

कहता है बाइडीन, रशिया से जीतना मुशकील, मालुम नहीं है कहाँ मंजील;

तुम न रहोगे मै न रहुंगी, फिर भी रहेगी, झीनपिंग पुटिन की नानीयाँ;


At some other day

थोड़ा सा war हुआ है, थोड़ा है बाक़ी;

बम़ तो पुटीन दे ही चुके है, बस एटमी धमाका है बाक़ी

शनिवार, 16 अक्टूबर 2021

लौट आ

 एक बार एक माओवादी जंगल से शहर आया। आदत के हिसाब से सुबह-सुबह लौटा ले के चल दिया, पर स्वच्छ भारत मिशन वालो ने पिछवाड़े पर डंडे मारकर उससे लौटा छिन लिया, तब से अपने रेडियो पर चैनल बदल बदल कर एक ही गाना बार बार बजा रहा है

Woh meri neend mera chain mujhe lauta do

Woh mera pyaar mera dard mujhe lauta d

o



मेरे नगर की ध्वस्त जलव्यवस्था

 हो ओ आने वाला नल, जाने वाला है, हो सके तो इसमें कटोरी चम्मच सब भर लो, नल जो ये जाने वाला है, अब कल परसों कहां आने वाला है हो ओ


मतिभ्रम(नल का इंतजार करते करते थकी आंखों का हाल)

इक बार टप्प से टिपका गिरा कहीं, दौड़ा नल आया तो नहीं है, पाया गीला कहीं नहीं, सुखा था हर कहीं।

हो ओ आने वाला नल जाने वाला है।

बुधवार, 27 जनवरी 2021

युं ही फिसल गए हा हा हा var 1.0

 औ मैं निकला हड्डी ले के, मैं भागा, सब ट्रेफिक, सब सिग्नल तोड आया, औ रब जाने, कब रस्ते में, सड़क पे इक मोड़ आया, उत्थे सब हड्डीयां तोड आया।


जो उड़ते थे  हाय...

वो जो उड़ते थे एक्सिलरेटर खिंचते खिंचते, 

लंगड़ा हो गए, ब्रेक मारते-मारते।

सोचता हूँ..

सोचता हूँ के वो कितने मासूम थे

हैंडिकैप्ड हो गए देखते देखते

सोचता हूँ के वो कितने मासूम थे

 हैंडिकैप्ड हो गए देखते देखते।


सर्वीस नहीं कराऊंगा, मैं फिर भी तुमको दौड़ऊंगा, 

ब्रेक फेल कर लें, तो शायद मैं मर जाऊंगा, मैं फिर भी एक्सिलरेटर दबाऊंगा, मैं फिर भी तुमको दौड़ऊंगा ।

शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

अगर तुम डांट दो

 दुनिया ठहर जाये;

निलम सिहर जाये,

कैसे तुम्हें रोका करुं,

कयामत सा कहर आये,

गर तुम डांट दो,

अगर तुम डांट दो;



मौसम बदल जाये,

पत्थर पिघल जाये,

आंखों में अंधेरा छाये,

भूकंप भी ठिठुर जाये

गर तुम डांट दो,

अगर तुम डांट दो।


एक बार जब खफा हो जाओ,

आसान नहीं कि संभल जाओ,

कैसे तुम्हें रोका करुं,

कयामत सा कहर आये

गर तुम डांट दो,

अगर तुम डांट दो।