रविवार, 6 नवंबर 2022

नीलम के बुढ़ापे का घुमर



 उम्र पच्चीस की सर पे ओढ़ के, डाय लगा के घुमे।


करके नये जमाने के फेशन, बुढऊ घुमर घुमर घुमे।


रिटायरमेंट की उम्र में शर्म जग की छोड़ के घुमे।


बुढऊ घुमर घुमर घुमे।


समझ आवे नहीं, टिवी मोबाइल की दुनिया 


सठिया गया बुढऊ घुमर घुमर घुमे।


याद रहे ना बिते पल कि बातें, बस भुले भटके अटकें।


बुढऊ सुनाय, तो कहानी बस घुमर घुमर घुमे।


छोड़ गये सब दोस्त यार, मिले नहीं कोई बतीयाने


और आवे नहीं निंद, तो बुढऊ घुमर घुमर घुमे।


भुख न लागे, बस चुरण पुड़िया चाटे , 


फिर भी आवे नहीं मोशन, तो बुढऊ घुमर घुमर घुमे।


ले नहीं पावे लटके-झटके ठुमके, ले तो कमरिया चटके,


डांस पार्टी का मुड़ बने तो, बुढऊ बस घुमर घुमर घुमे।


नीलम कवी के ठाठ बुढ़ापे में घूमर घूमर घूमर घूमर घूमर घूमे रे


घूमर घूमर घूमे रे भाईसा घूमर घूमे रे