दुनिया ठहर जाये;
निलम सिहर जाये,
कैसे तुम्हें रोका करुं,
कयामत सा कहर आये,
गर तुम डांट दो,
अगर तुम डांट दो;
मौसम बदल जाये,
पत्थर पिघल जाये,
आंखों में अंधेरा छाये,
भूकंप भी ठिठुर जाये
गर तुम डांट दो,
अगर तुम डांट दो।
एक बार जब खफा हो जाओ,
आसान नहीं कि संभल जाओ,
कैसे तुम्हें रोका करुं,
कयामत सा कहर आये
गर तुम डांट दो,
अगर तुम डांट दो।